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विधानसभा सत्र:- बेनामी संपत्तियों पर चर्चा, विपक्ष का सदन से वाकआउट

विपक्ष का विधानसभा अध्यक्ष के कमरे के बाहर धरना

अशोका टाइम्स/पांवटा साहिब

वाकआउट से नाराज मुख्यमंत्री ने की कडी़ निंदा

शिमला। प्रदेश विधानसभा के सातवें दिन प्रश्नकाल काल से पहले बेनामी संपत्तियों पर चर्चा मांग रहे विपक्ष ने सदन से वाकआउट कर दिया।

विपक्ष प्रदेश में बेनामी संपत्तियों को लेकर सदन में स्थगन प्रस्ताव 67 के तहत चर्चा की मांग कर रहा था। लेकिन अध्यक्ष ने व्यवस्था दी कि नोटिस सरकार को भेज दिया गया है, उनके जवाब आने के बाद आप आप अपनी बात सदन में रख सकते हैं, उससे पहले नहीं।

इससे नाराज विपक्ष ने कुछ देर अपनी सीटों पर ही खड़े होकर नारेबाजी की और विपक्ष की आवाज दबाने के आरोप भी लगाए। चर्चा की अनुमति न देने के कारण नाराज होकर विपक्ष ने सदन से वाकआउट कर दिया।

विपक्ष के वाकआउट से नाराज मुख्यमंत्री ने विपक्ष के व्यवहार की कडी़ भर्त्सना करते हुए कहा कि विपक्ष का व्यवहार जिम्मेदारी भरा नही है। विपक्ष को चर्चा और सवालों के जरिए सारे सवाल पूछने की अनुमति हैं और जवाब के रूप में सहीं और पूरी जानकारी सदस्यों को उपलब्ध करवाई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष पिछले कई दिनों से आसन के खिलाफ भी टिप्पणियां कर रहा है जो कि एक अच्छी परंपरा नहीं है। इसको सभी को मिलकर रोकना चाहिए नहीं तो आने वाले वक्त के लिए गलत पंरपरा शुरू हो सकती है।

विधानसभा अध्यक्ष से मिलने सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही दलों के सदस्य जा सकते हैं लेकिन उन्होंने अपने 23 साल के विधानसभा के इतिहास में ऐसा पहले कभी नही देखा कि विपक्ष विधानसभा अध्यक्ष के कमरे के बाहर ही धरने पर बैठ जाए। इससे सदन के अंदर व बाहर की व्यवस्थाएं चरमरा रही हैं। सदन की व्यवस्थाओं का सम्मान करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा कि सरकार ने नियम 67 के तहत पहली बार चर्चा दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष को तब विषय की गंभीरता को देखते हुए ये चर्चा दी गई थी लेकिन विपक्ष यहां भी अपनी बात तथ्यों के साथ रखने और महत्वपूर्ण सुझाव देने में नाकाम रहा।

संसदीय कार्यमंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल देश की इकलौती ऐसी विधानसभा है जहां मानसून सत्र दस दिन का चलाया जा रहा है जबकि बाकी राज्यों में तीन दिन से अधिक सत्र नहीं चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सिर्फ अखबारों में बने रहने के लिए बिना तथ्यों के बात करता है।

उन्होंने कहा कि रोजाना प्रश्नकाल को बाधित कर विपक्ष प्रदेश की जनता के लाखों रूपए का नुकसान कर रहा है। एक प्रश्न के जवाब को सदन में लाते-लाते लाखों रूपए खर्च हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष को नोटिस के साथ-साथ एवीडेंस भी देना होता है।

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि सारे देश व प्रदेश की बेनामी संपत्तियों की चिंता विपक्ष को है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का विधानसभा अध्यक्ष के कमरे के बाहर धरने पर बैठना व उनके अलोकतांत्रिक व्यवहार की जितनी भी भर्त्सना की जाए, उतनी कम है।

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