UA-176735881-1

जागरूकता, भ्रष्टाचार उजागर, जनहित कार्यों का नाम है पत्रकारिता…राजेंद्र

राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर पांवटा प्रेस क्लब की बैठक संपन्न

ASOKA TIMES/पांवटा साहिब

राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर पांवटा प्रेस क्लब द्वारा ऑनलाइन बैठक का आयोजन किया गया जिसमें जिसमें पत्रकारों ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर अपने विचार सांझा किए।

इस मौके पर पांवटा प्रेस क्लब के अध्यक्ष राजेंद्र तिवारी ने कहा कि आम जनता और प्रशासन पुलिस के बीच की कड़ी है पत्रकारिता अपराध या कोई भी ऐसी सूचना जो समाज हितैषी हो वह लोगों तक पहुंचाना पत्रकार की जिम्मेदारी होती है इस जिम्मेदारी में तथ्यों सहित सच उजागर करना पत्रकार की काबिलियत दर्शाती है।

इस मौके पर श्रीकांत अकेला सम्पादक ,शंखनाद के विचारों को भी सांझा किया गया….लोकतांत्रिक देशों में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के क्रियाकलापों पर नजर रखने के लिये मीडिया को ‘‘चौथे स्तंभ’’ के रूप में जाना जाता है ,मीडिया अगर सकारात्मक भूमिका अदा करें तो किसी भी व्यक्ति, संस्था, समूह और देश को आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक रूप से समृद्ध बनाया जा सकता है

वर्तमान समय में मीडिया की उपयोगिता, महत्त्व एवं भूमिका निरंतर बढ़ती जा रही है। कोई भी समाज, सरकार, वर्ग, संस्था, समूह व्यक्ति मीडिया की उपेक्षा कर आगे नहीं बढ़ सकता।

प्रभाव पर गौर करने पर स्पष्ट होता है कि मीडिया की समाज में शक्ति, महत्ता एवं उपयोगिकता में वृद्धि से इसके सकारात्मक प्रभावों में काफी अभिवृद्धि हुई है लेकिन साथ-साथ इसके नकारात्मक प्रभाव भी उभर कर सामने आए हैं।

मीडिया ने जहाँ जनता को निर्भीकता पूर्वक जागरूक करने, भ्रष्टाचार को उजागर करने, सत्ता पर तार्किक नियंत्रण एवं जनहित कार्यों की अभिवृद्धि में योगदान दिया है, वहीं लालच, भय, द्वेष, स्पर्द्धा, दुर्भावना एवं राजनैतिक कुचक्र के जाल में फंसकर अपनी भूमिका को कलंकित भी किया है।

व्यक्तिगत या संस्थागत निहित स्वार्थों के लिये यैलो जर्नलिज़्म को अपनाना, ब्लैकमेल द्वारा दूसरों का शोषण करना, चटपटी खबरों को तवज्जों देना और खबरों को तोड़-मरोड़कर पेश करना, दंगे भड़काने वाली खबरे प्रकाशित करना, घटनाओं एवं कथनों को द्विअर्थी रूप प्रदान करना, भय या लालच में सत्तारूढ़ दल की चापलूसी करना, अनावश्यक रूप से किसी की प्रशंसा और महिमामंडन करना और किसी दूसरे की आलोचना करना जैसे अनेक अनुचित कार्य आजकल मीडिया द्वारा किये जा रहे हैं।

मीडिया अपनी खबरों द्वारा समाज के असंतुलन एवं संतुलन में भी बड़ी भूमिका निभाता है। मीडिया अपनी भूमिका द्वारा समाज में शांति, सौहार्द, समरसता और सौजन्य की भावना विकसित कर सकता है। सामाजिक तनाव, संघर्ष, मतभेद, युद्ध एवं दंगों के समय मीडिया को बहुत ही संयमित तरीके से कार्य करना चाहिये।

मीडिया आज विनाशक एवं हितैषी दोनों भूमिकाओं में सामने आया है। अब समय आ गया है कि मीडिया अपनी शक्ति का सदुपयोग जनहित में करे और समाज का मागदर्शन करे ताकि वह भविष्य में भस्मासुर न बन सके।

इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार सुरेश तोमर, आदेश शर्मा, अमित कुमार, पंकज भटनागर, गुरुदत्त, अशोक बहुता आदि ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप को लेकर अपने विचार सांझा किए।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *