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पांवटा साहिब में बढ़ रही जानलेवा ड्रग्स की डिमांड.. ?

पुलिस प्रयास नाकाफी..ड्रग्स माफिया की संपत्ति बढ़ कर हुई डबल…!

अशोका टाइम्/पांवटा साहिब

पांवटा साहिब के तकरीबन हर वार्ड में चरस अफीम स्मैक बेचने जैसे कारोबार धड़ल्ले से चल रहे हैं जिन पर पांवटा पुलिस सीधी कार्यवाही करने से बचती नज़र आ रही है ।

बीते दिनों पांवटा पुलिस अधिकारियों ने नशा बेचने वाले माफियाओं के घरों के बाहर होमगार्ड महिला और पुरुष जवानों को तैनात किया सुबह से शाम तक ड्रग्स और दूसरे नशे के धंधे में संलिप्त लोगों के घर के बाहर जवानों ने चाय और कोल्ड ड्रिंक का जमकर मजा लिया पुलिस की इस कार्रवाई के साथ ही नशा माफियाओं ने भी अपनी दिनचर्या बदली उन्होंने सुबह 8 बजे से पहले और रात को 8 बजे के बाद अपने धंधे को चलाना शुरु कर दिया वहीं दूसरी ओर इस पुलिस कार्रवाई प्रणाली में खामी यह रही कि जवानों कि कोई जवाबदेही या दिनचर्या की जो जवाबदेही बनती है वह तय नहीं की गई नतीजा कोई मामला दर्ज नहीं बल्कि नशा माफियाओं के पुलिस में संबंध और अधिक गहरे बन गए।

दरअसल पांवटा साहिब में लगातार स्मैक चरस अफीम और भुक्की जिसे हम चूरा पोस्त डिमांड बढ़ रही है। वहीं पांवटा साहिब में बेहद तेज गति से युवा शिकार हो रहे हैं । हम बात करते हैं पांवटा साहिब के सबसे अधिक प्रभावित हाउसिंग बोर्ड, रामपुर घाट, बद्रीपुर के वार्ड नंबर 1शहरी और कॉलेज रोड, शहर के वार्ड नंबर 9 ..10 ओर बातामंडी, माजरा, कोलर में दो दर्जन के करीब लोग नशे के कारोबार में संलिप्त है यह लोग कभी घर से बाहर निकल कर ड्रग्स का कारोबार नहीं करते बल्कि इन लोगों के पास पहुंचने वाले नशे की लत से परेशान युवा वर्ग की एक पूरी फौज है ।

महज एक या दो समय की डोज़ के लिए युवा चरस अफीम स्मैक चूरा पोस्त को उनके पीने वालों तक पहुंचाने का काम करते हैं । यही चक्रव्यू है जिसमें पुलिस और बड़े नशा माफियाओं की सांठगांठ देखने को मिलती है लगभग 90 परसेंट मामलों में बेहद गरीब फटे हाल कपड़े पहने युवा वर्ग को दो-चार 6 ग्राम स्मैक अफीम के साथ अक्सर पुलिस दबोच लेती है और इस काले धंधे में अपनी संलिप्तता छुपाने के लिए खुद ही अपनी पीठ पर थपकियां देकर वाहवाही लूट रही होती है ।

दरअसल पुलिस जिन युवा वर्ग को जेलों में ठूंस रही हैं उन्हें अस्पताल और नशा मुक्ति केंद्रों में इलाज के लिए भेजना चाहिए हम यह नहीं कहते कि सभी मामले फर्जी हैं लेकिन अधिकतर मामलों में अगर आप आरोपियों का बैकग्राउंड चेक करते हैं तो उनके घर में दो वक्त की रोटी कपड़ा नसीब नहीं होता तो फिर वह ड्रग्स के कारोबारी कैसे हो सकते हैं दरअसल वह नशे के आदी हैं।

वहीं दूसरी ओर किसी से भी छिपा नहीं है रामपुर घाट, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, कॉलेज रोड, वार्ड नंबर 1.. वार्ड नंबर 9… 10 …11 अन्य कई वार्डों में जो लोग नशे का बड़ा कारोबार चला रहे हैं उनके पास कई कई प्लॉट, मकान, महंगी गाड़ी मौजूद हैं।

पुलिस का खुफिया विभाग बाकायदा रेकी कर इन लोगों की जानकारी रखता है लेकिन पुलिस सीधी कार्रवाई से ना जाने क्यों खुद को बचाकर रखती है जब तक सीधे तौर पर मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार नहीं लिया जाएगा तब तक पांवटा शहर गांव के युवाओं को नहीं बचाया जा सकता।

बता दें कि यह सभी आरोप नशा माफियाओं के घर के आस-पास डरे सहमे लोगों के हैं जिनके हम नाम उजागर नहीं कर सकते वहीं इसकी सत्यता के लिए समय-समय पर हमने भी अपने सुत्रों को मौकों पर भेजा है ‌।

 

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